M.A 2nd Year Bhojpuri Sahitya Important Questions 2023

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As you know that Bhojpuri literature was developed in the 7th century. 

This language is mostly spoken in utter Pradesh and Bihar (India). 

The first Bhojpuri language novel "Bindia" was published in 1956. This was written by Ram Nath Pandey. 

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First of all, write the questions in copy and learn the related chapter in the Bhojpuri textbook. 

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The revision process will be easy for you. 

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Today this is an international language. 

The Bhojpuri language is honored as a national language in Mauritius.

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Bhojpuri Literature Questions

Questions Paper Of M.A. Second Year 2023 (Bhojpuri) - एम ए भोजपुरी साहित्य के प्रश्न (पार्ट 2)

प्रथम सेट क्वेश्चन पेपर 2023 (मॉडल सेट पेपर 2023)

  • आधुनिक भोजपुरी कविता में गजल अथवा दोहा विधा के परम्परा आ विषय-वस्तु के उद्धरण सहित विवेचन करीं।
  • आधुनिक भोजपुरी कविता के काल विभाजन आ नामकरण के का आधार बा ? एकर व्यापक समीक्षा उदाहरण सहित प्रस्तुत करीं ।
  • उमाकान्त वर्मा के कहानी-कला के विवेचन करीं ।
  • भोजपुरी कहानी साहित्य के परम्परा पर व्यापक प्रकाश डालीं ।
  • भोजपुरी उपन्यास साहित्य के विशेषता पर प्रकाश डालीं ।
  • योगेन्द्र प्रसाद सिंह के उपन्यास 'फुलमतिया' के मूल्यांकन करीं ।
  • डा० विवेकी राय के निबन्ध कला के विवेचन करीं ।
  • 'बिरजु के बिआह' नाटक के परिचय दीं आउर नाटक परम्परा में एकर स्थान बताई ।
  • भोजपुरी आलोचना साहित्य के विशेषता पर एगो लमहर निबन्ध लिखीं ।
  • टिप्पणी लिखीं:- (क) भोजपुरी में पुस्तक समीक्षा (ख) भोजपुरी काव्य में प्रकृति
  • भाषा विज्ञान के प्रधान आ गौण शाखा के विवेचन करी ।
  • भाषा के उत्पत्ति से सम्बन्धित विभिन्‍न सिद्धान्त के समीक्षा करीं |
  • ध्वनि परिवर्तन से का तात्पर्य बा? ध्वनि परिवर्तन के कारण सोदाहरण लिखीं ।
  • वाक्य प्रकारन पर प्रकाश डालीं ।
  • अर्थ परिवर्तन के उदाहरण सहित कारण लिखीं ।
  • भाषा परिवार के का मतलब ह? भाषा परिवार के भीतर भोजपुरी के स्थान बताई ।
  • “बिहारी भाषा” से रठआ का समझत हई। एकर नाम “बिहारी भाषा” काहे पड़ल?
  • भोजपुरी में संज्ञा पद के स्त्रीलिंग बनावे के विभिन्‍न पद्धति पर विचार करीं ।
  • देवनागरी लिपि के विशेषता पर प्रकाश डालीं ।
  • निम्न शब्दन के व्युत्पति बताई- बेरा, चलिहे, अइसन, घरहि, आजु, घडी, तोड, अउरि।
  • रेखाचित्र के रूप में 'सुरतिया ना बिसरे' ग्रंथ के आलोचनात्मक परीक्षण करीं ।
  • खॉटी राजपूत” आ 'जगतपती बैद्य' शीर्षक रेखाचित्र के कथ्य के परिचय दी ।
  • सुरता के पथार' संस्मरण केमुख्य भाव अपना शब्दन में लिखीं ।
  • साहित्य विधा के रूप में रेखाचित्र आ संस्मरण के बीच भेद के रेखांकित करीं ।
  • यात्रा वर्णन के इतिहास संक्षेप में लिखीं ।
  • उत्तरी सीमा के रक्षक: बाबा सोमेस्वर नाथ' के विषय वस्तु से परिचित करवाई ।
  • आचार्य महेन्द्र शास्त्री के व्यक्तित्व के परिचय दीहीं ।
  • आचार्य महेन्द्र शास्त्री के वैयक्तिक विचार के परिचय दीहीं ।
  • 'ऐनक' में वर्णित लोकहित के विषयन के समालोचना प्रस्तुत करीं ।
  • पाश्चात्य काव्य शास्त्र के विकास प एगो छोट निबन्ध लिखीं ।
  • अरस्तू के अनुकरण सिद्धान्त के मौलिकता के रेखांकित करत ओकर विश्लेषण करीं ।
  • भारतीय रस सिद्धान्त (साधरणीकरण) के संदर्भ में अरस्तू के विरेचन सिद्धान्त के विश्लेषण करीं ।
  • टी० एस० इलियट के परम्परा आर वैयक्तिक प्रज्ञा विषयक विचारनि के विवेचन करीं ।
  • सम्प्रेषण के भाषिक तंत्र प विचार करीं ।
  • “सम्प्रेषण एगो अचेत क्रिया ह“-रिचर्ड्स के एह कथन के समीक्षा करीं ।
  • अभिव्यंजनावाद सिद्धान्त एगो व्यापक काव्य-सिद्धान्त हवे एह कथन के मीमांसा करीं ।
  • कॉडवेल के कविता सम्बन्धी मान्यता पर विचार निरूपित करीं ।
  • फ्रायड आ मार्क्स के कला सम्बन्धी मत के अपना भाषा में उपस्थिपित करीं ।
  • भारतीय काव्याचार्य लोग के मत के उल्लेख करत, महाकाव्य के सैद्धान्तिक परिचय दी ।
  • भोजपुरी प्रबंध काव्य के काल क्रमिक परिचय दीं, आ ओकरा उद्भव अउर विकास के रेखांकित करीं।
  • महाकाव्य के दृष्टि से 'कालजयी कुँवर सिंह' महाकाव्य के समीक्षा करीं |
  • बुद्धायन' के शिल्पगत परिचय देत ओकरा भाषिक संरचना पर विचार करीं ।
  • 'द्रौपदी' के कथावस्तु आ चरित्र पर एगो लमहर लेख लिखीं|
  • कबीरदास एगो आध्यात्मिक संत रही, उदाहरण के साथ स्पष्ट करी ।
  • “बटोहिया' गीत के समीक्षा करीं ।
  • रामदेव द्विवेदी अलमस्त' के व्यक्तित्व आ कृतित्व के विवेचन करीं ।
  • 'शरद' शीर्षक कविता में भाव पक्ष प्रधान बा कि कला-पक्ष ? उदाहरण देत स्पष्ट करी ।
  • 'फन कढ़ल पुरवइया' कविता में प्रकृति के वर्णन कइसन भइल बा ? उदाहरण सहित लिखी ।
  • उपन्यास के कथानक के निर्माण के प्रक्रिया पर प्रकाश डालीं ।
  • भोजपुरी उपन्यास के विकास के एगो संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करीं ।
  • 'फुलसुंघी' नाम के औचित्य पर आपन विचार तर्क॑पूर्ण ढंग से लिखीं ।
  • 'फुलसुंघी' के भाषा आ संवाद योजना के समीक्षा करीं ।
  • 'फुलसुंघी' के नायक के हो सकत बा ? तर्क के साथ विवेचन करीं ।
  • 'इमरीतिया काकी' उपन्यास के संक्षिप्त कथानक प्रस्तुत करीं ।
  • 'इमरीतिया काकी' के उद्देश्य पर एगो निबंध लिखीं ।
  • इमरीतिया काकी के चरित्र-चित्रण करीं ।
  • 'ग्रामदेवता' के शिल्प-योजना पर प्रकाश डालीं ।
  • ग्रामदेवता के वस्तुपरक विशेषतन पर प्रकश डालीं ।
  • भोजपुरी नाटक के सन्‌ 4947 से 4974 ई० के विकास के संक्षिप्त परिचय दीं ।
  • लोककलाकार भिखारी ठाकुर के समय के सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक आ सांस्कृतिक परिवेश के आकलन करी ।
  • बिदेसिया' के गीत योजना पर प्रकाश डालीं ।
  • “बिदेसिया' एगो बहू उद्देशीय रचना बा” प्रमाणित करू ।
  • 'केहु न हमार' नाटक में मानवतावाद के स्थापना भइल बा, ओकरा के विस्तार से लिखीं ।
  • केहु न हमार' से का सीख मिलता । विस्तार से लिखीं ।
  • 'शुरूआत' के कथानक के प्रस्तुत करीं ।
  • 'शुरूआत' के रंगमंचीय स्थिति पर विचार करीं ।
  • हाथी के दाँत' में व्यक्त लेखक के विचार के प्रस्तुत करीं ।
  • बाल्मीकीय रामायण के परिचय दीं ।
  • संस्कृत के लौकिक साहित्य के परिचय दीं ।
  • संस्कृत गीति काव्य-परम्परा के परिचय दीं ।
  • मलयालम भाषा के नाटकन के विवरण दीं ।
  • कन्‍नड़ आलोचना पर एगो निबंध लिखीं ।
  • गांधी-युग नामकरण के औचित्य पर विचर करते हुए एह युग के साहित्यकारन के परिचय दीं ।
  • चैतन्य पूर्व युग के कवियन के परिचय दीं ।
  • उर्दू के हास्य-व्यंग्य साहित्य के परिचय दीं ।
  • कबीर ज्ञानाश्रयी शाखा के श्रेष्ठ कवि रहनी' एकर विवेचना करीं ।
  • हिन्दी उपन्यास के विकास पर प्रकाश डालीं ।

द्वितीय सेट क्वेश्चन पेपर 2023 (मॉडल सेट पेपर 2023)

  • आधुनिक भोजपुरी कविता के काल विभाजन आ नामकरण के का आधार बा? एकर व्यापक समीक्षा उदाहरण सहित प्रस्तुत करीं।
  • आधुनिक भोजपुरी कविता में स्वतंत्रता-पूर्व राष्ट्रीय चेतना आ देश भक्ति भावना के सोदाहरण विवेचन करी।
  • भोजपुरी कहानी साहित्य के प्रमुख चार कहानीकार के परिचय दीं।
  • कहानीकार मधुकर सिंह के कहानी कला के विवेचन करीं।
  • भोजपुरी के पहिलका उपन्यासकार के है? उहाँ के परिचय दीहीं।
  • भोजपुरी निबन्ध के उद्गम आ विकास पर एगो निबंध लिखीं।
  • भोजपुरी नाटक के परिचय दीं।
  • नाटककार के रूप में सुरेश कांटक के परिचय दीं।
  • भोजपुरी के प्रमुख पत्रिकन के परिचय दीं।
  • भोजपुरी आलोचना साहित्य के विकास प एगो लमहर निबन्ध लिखीं।
  • भाषा के वैज्ञानिक परिभाषा लिखीं आ ओकर विश्लेषण करीं।
  • कब बोली भाषा बन जाले? भाषा आ बोली में अंतर स्पष्ट करीं।
  • ध्वनि परिवर्तन से का तात्पर्य बा? ध्वनि परिवर्तन के कारण सोदाहरण लिखीं।
  • वाक्य प्रकारन पर संक्षिप्त प्रकाश डालीं।
  • शब्द आ पद के साम्य वैषम्य पर प्रकाश डालीं।
  • बिहारी भाषा के भौगोलिक क्षेत्र आ ओकर उत्पत्ति पर प्रकाश डालें।
  • मैथिली विभाषा या बोली के भेदन पर संक्षेप में प्रकाश डाली।
  • भोजपुरी भाषा में शब्दन के मानकीकरन आ एकरूपता में कवन-कवन बाधक बा।
  • धातु के केतना भेद होला? सिद्ध धातु, साधित धातु आ नाम धातु से का समझत हई?
  • भोजपुरी शब्दन के व्युत्पत्ति बताई - चलिहे, बेरा, एने, इहवाँ, तहवाँ, जहवाँ, कुजुन, चलीं।
  • “सुरतिया ना बिसरे” रेखाचित्र के दार्शनिक एवं मनोवैज्ञानिक संदर्भ पर प्रकाश दीहीं।
  • “एह (सुरतिया ना बिसरे) रेखाचित्र समाज में मानव के आसपास घटेवाली घटना के उपर लिखल गइल बा“-एह कथन की सत्यता के परीक्षा करीं।
  • “सुरतिया न बिसरे” के कौनो दो रेखाचित्र के सारांश आ उद्देश्य पर प्रकाश डालीं।
  • “सुरथा के पथार” संस्मरण के मुख्यभाव अपना शब्द में लिखीं।
  • साहित्य के विधा के रूप में संस्मरण आ जीवनी के बीच भेद के रेखांकित करीं।
  • शैली आ शिल्प की दृष्टि से यात्रा वर्णन के विभिन्‍न रूपन के परिचय दीहीं।
  • “सासाराम” आ “ई राँची ह” के विषय वस्तु पर प्रकाश दीहीं।
  • आचार्य महेन्द्र शास्त्री के सामाजिक विचार के परिचय दीहीं।
  • रिपोर्ताज के विशेषता का परिचय दीहीं।
  • शाहबादी जी के रचना “ऐनक' में प्रकृति वर्णन के परिचय दीहीं।
  • पाश्चात्य काव्य शास्त्र के विकास पर एगो छोट निबन्ध लिखीं।
  • अरस्तू के अनुकरण सिद्धान्त के स्पष्ट करीं।
  • अरस्तू के विरेचन सिद्धान्त के समीक्षा करीं।
  • “परम्परा बोध ना ता रूढ़ि के पालन ह अ ना व्यैक्तिक प्रज्ञा के विरोधी”- इलियट के एह कथन के तर्कपूर्ण विवेचन करीं।
  • आई० ए० रिचर्ड्स के मूल्य-सिद्धान्त के विवेचन करीं।
  • “अभिव्यंजना सिद्धांत एगो व्यापक काव्य-सिद्धान्त हवे“, एह कथन के विश्लेषण करी।
  • भाषापरक दृष्टि से काडवेल के विचार निरूपित करीं।
  • कला के वर्गीकरण प आपन अभिमत व्यक्त करीं।
  • प्रतीक के महत्त्व बतावत परम्परागत प्रतीक से ओकर सम्बन्ध रेखांकित करी।
  • शैली विज्ञान के अवधारणा के स्पष्ट करी।
  • प्रबंध काव्य के अवधारणा पर विचार करत ओकरा भेदन के संक्षेप में परिचय दीं।
  • भोजपुरी प्रबंध काव्य के रस-विधान आ भाषिक संरचना पर आपन विचार प्रस्तुत करीं।
  • “कालजयी कुँवर सिंह” महाकाव्य के समीक्षा भारतीय काव्य शास्त्रीय निकष पर करीं।
  • “विश्वमित्र” के वस्तुशिल्प आ भाषिक संरचना के विशेषता के रेखांकित करीं।
  • “द्रौपदी” के कथावस्तु आ चरित्र पर एगो लगहर लेख लिखीं।
  • "आगि लागे बनवाँ जरे परवतवा” पद के भावार्थ अपना भाषा में लिखी।
  • “फिरंगिया” कविता के विशेषता रेखांकित करीं।
  • संत कवि धरनीदास के अध्यात्मिक पक्ष के वर्णन करीं।
  • तैयब हुसैन पीड़ित के साहित्यिक विशेषता बतलायी।
  • सप्रसंग व्याख्या लिखी:- (क) तोहरो दरद दुनिया तनिको ना बूझे, कहेले गँवार तोहके झूठहूँ के जूझे, जवने में न बस कवनो ओ मे कवन चारा।। (ख) सुन्दर सुथरभूमि भारत के रहे रामा, आज इहे भइल मसान रे, अन्न, धन, जन, बल, बुद्धि सब नासभइल, कौनो के ना रहल निसान रे फिरंगिया।।
  • उपन्यास के वर्गीकरण के विभिन्‍न दृष्टियन पर विचार करीं।
  • भोजपुरी उपन्यास का विकास के एगो संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करीं।
  •  “फुलसुंधी” सामन्ती प्रेम कथा ह। एह कथन के समीक्षा करीं।
  • “फुलसुंधी” के गुलजारी बाई नारी-त्रासदी के उदाहरण बाड़ी-एह कथन पर अपना विचार लिखीं |
  • स्व0 रामनाथ पाण्डेय के व्यक्तित्व आ कृतित्व के आकलन करीं।
  • “इमरीतिया काकी” के उद्देश्य पर एगो लघु निबंध लिखीं।
  • “इमरीतिया काकी” समकालीन समस्या से जुड़ल उपन्यास बा। एह कथन के स्पष्ट करीं।
  • “ग्राम देवता” का शीर्षक के औचित्य पर प्रकाश डाली।
  • “ग्राम देवता” के संवाद-योजना पर आपन विचार दीहीं।
  • महेन्द्र मिसिर, जोगावन पाण्डे, हरख नारायण मौर्य एडवोकेट में से कवनो एक गो पात्र के चत्रिण-चित्रण करीं।
  • नाटक में गीत-नृत्य के महत्त्व पर प्रकाश डालीं।
  • भिखारी ठाकुर रचित “बिदेसिया” के कथानक अपना शब्द में प्रस्तुत करी।
  • “बिदेसिया” के गीत-योजना पर प्रकाश डाली।
  • “केहू ना हमार” नाटक के शिल्प एवं अभिनेता के समीक्षा करी।
  • “केहू ना हमार” नाटक में आज के गाँव के छल-कपट के बरनन भइल बा, समझा के लिखी।
  • “शुरूआत” के कथानक के आलोचनात्मक रूप में प्रस्तुत करी ।
  • “शुरूआत” के रंगमंचीय स्थिति पर विचार प्रकट करीं।
  • “हाथी के दाँत” नाटक के नामकरण के सार्थकता पर विचार करीं।
  • संस्कृत के महाकाव्यन के परिचय दीहीं।
  • संस्कृत के नाट्य साहित्य के परिचय दीहीं।
  • मलयालम के कहानियन के इतिहास लिखीं।
  • वीर शैवयुग (कन्नड़) के काव्य के परिचय दी।
  • गुजराती साहित्य के वैष्णव भक्तिधारा के कवियन के परिचय दी।
  • बंगला के प्रमाख्यान-काव्य के परिचय दी।
  • उर्दू के कहानी-साहित्य के परिचय दी।
  • “तमिल साहित्य में भक्ति साहित्य” के परिचय दी।
  • छायावाद के सामान्य प्रवृत्ति के उद्घाटन करीं।
  • हिन्दी साहित्य के कौनो दू गो उपन्यास लेखक के सामान्य परिचय दीं।

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Rajesh Deepak
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