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विषमदैशिकता क्या होती है, विषमदैशिकता अंग्रेजी में क्या कहते हैं, समदैशिकता किसे कहते हैं और अंग्रेजी में इसका नाम क्या होता है?

आज आपके समक्ष इस पोस्ट के माध्यम से ये जानकारी दे रहे हैं की विषमदैशिकता किसे कहते हैं? इसे अंग्रेजी में क्या कहते हैं | आपको बता दें की इसकी परिभाषा यहाँ तीन प्रकार से दी गयी है | दोनों सही हैं आप उत्तर के रूप में दोनों में से कोई एक चुन सकते हैं |

विषमदैशिकता किसे कहते है और विषमदैशिकता को अंग्रेजी में क्या बोलते हैं ?

उत्तर (A) - क्रिस्टलीय ठोसों के कुछ गुण जैसे-विद्युत् चालकता, अपवर्तनांक आदि के मान भिन्न-भिन्न दिशाओं से जानकारी लेने पर भिन्न-भिन्न प्राप्त होते हैं। क्रिस्टलीय ठोसों की इसी प्रवृत्ति को विषमदैशिकता कहते हैं | क्रिस्टलीय ठोस को जब हम गर्म करते हैं तो ये एक निश्चित तापमान पर द्रव में परिवर्तित हो जाता है और इसमें पांच क्रिस्टलीय ठोस के साथ ही विषमदैशिकता का का गुण प्राप्त किया जाता है | इसका मूल कारण है की क्रिस्टल लिए ठोसो में कई भौतिक गुण जैसे - चालकता अपवर्तनांक कठोरता के मान अलग अलग दिशा में अलग अलग होता है, ये समान नहीं होता है |

उत्तर (B) - आपको बता दें की विषमदैशिकता-घनीय क्रिस्टल संरचना को छोड़ कर बाकी सभी क्रिस्टलीय ठोसों के भौतिक गुणधर्म यानी - सामर्थ्य, यांत्रिक सामर्थ्य, कठोरता, तनन, चालकता, अपवर्तनांक का मान प्रत्येक दिशा में अलग-अलग होता है | इसी गुण को विषमदैशिकता कहते हैं | इसका सीधा उदहारण है की घनीय क्रिस्टल विषमदैशिक नहीं होते हैं लेकिन इसके अलावा सभी  क्रिस्टलीय ठोस विषमदैशिक की श्रेणी में आते हैं |

उत्तर (C) - इसे इस तरह से भी समझा जा सकता है की ठोसों के भौतिक गुण जैसे की ऊष्मा की चालकता, यांत्रिक सामर्थ्य, विधुत अपवर्तनांक का मान भिन्न भिन्न दिशा में भिन्न भिन्न होता है, यही कारण है की विषमदैशिकता का नाम दिया गया है |

विषमदैशिकता को अंग्रेजी में क्या कहते हैं?

आपको बता दें की विषमदैशिकता को अंग्रेजी में Anisotropy यानी ऐनाइसाट्रपी कहते है 

विषमदैशिकता के कारणों को बतायें 

जैसा की परिभाषा में कहा गया है की क्रिस्टलीय ठोसों के अवयवी कण व्यवस्थित रहते हैं और ये इनकी प्रत्येक दिन की व्ववस्था रहती है, इस कारण से एक दिशा में समान प्रकार के कणों की उपस्थिति रहती है, जबकि दिशा में दो तरह के कण एक ही क्रम में होते हैं | इसी कारण से इनके भौतिक गुणों के मान में भिन्नता सभी दिशावों में अलग अलग होती है | ये ही विषमदैशिकता के कारण हैं |

निचे दिए गएँ चित्र में क्रिस्टलीय ठोस में विध्यमान अवयवी कणों की एक निश्चित अवस्था को दर्शाया गया है -

इस चित्र के द्वारा ये बताया गया है की अगर क्रिस्टलीय ठोस में प्रकाश पुंज को AB दिशा से भेजते हैं तो प्रकाश मार्ग के दोनों तरफ समान अवयवी कणों की पंक्तियाँ मौजूद होती हैं जबकि CD दिशा में ये कण एकांतर क्रम में मौजूद होते हैं | इस कारण से AB के साथ ही CD दिशा में अवयवी कणों का प्रभाव अलग-अलग पड़ने के कारण ही प्रकाश के अपवर्तनांक के अलग-अलग मान की प्राप्ति होती है और यही कारण है की भौतिक गुणों का मान सभी दिशाओं में अलग-अलग होता है, यही विषमदैशिकता के कारण होते हैं |


विषमदैशिकता क्या होती है
विषमदैशिकता क्या होती है


क्रिस्टलीय ठोस के चार प्रकार होते हैं - आण्विक ठोस, अध्रुवीय आण्विक ठोस, ध्रुवीय आण्विक ठोस, आयनिक ठोस |

समदैशिकता किसे कहते हैं और अंग्रेजी में इसका नाम क्या होता है?

उत्तर - समदैशिकता को अंग्रेजी में isotropy कहते हैं और इसकी परिभाषा है - अक्रिस्टलीय ठोसों में अवयवी कणों की एक निश्चित व्यवस्था नहीं होने के कारण, इनके भौतिक गुणधर्म जैसे - तनन सामर्थ्य, कठोरता, चालकता, अपवर्तनांक और यांत्रिक सामर्थ्य के मान सभी दिशाओं में एक समान होते है। इसी गुण को समदैशिकता कहते हैं|

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