DNA fingerprint kya hai, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग क्या है, डीएनए फिंगरप्रिंट की खोज किसने की थी

आज जानते हैं की DNA fingerprint kya hai, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग क्या है, डीएनए फिंगरप्रिंट की खोज किसने की थी? इसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी होगी की ये क्या है डीएनए फिंगरप्रिंट क्या है? और किन इनका उपयोग किस लिए किया जाता है | इन सभी प्रश्नों का उत्तर इस पोस्ट में देने की एक कोशिश है अगर कुछ छुट गया हो तो कमेंट कर जरुर बतायें | उसके हिसाब से पोस्ट में सुधार किया जायेगा |


डीएनए फिंगरप्रिंट
डीएनए फिंगरप्रिंटिंग 


डीएनए फिंगरप्रिंट क्या है?

आपको बता दें की डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एक तकनीक या टेक्नोलॉजी है, जिसका उपयोग क्राइम से सम्बंधित मामलों को सुलझाने में किया जाता है, ये तकनीक पुलिस विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण रोल निभाती है | इसके और भी उपयोग होते हैं जैसे किसी वयक्ति की पहचान, बच्चे की माँ की पहचान, पिता की पहचान के सटीक निर्धारण के लिए भी प्रयोग में लायी जाती है | ये तो हुआ इसका व्यज्ञानिक नाम, इसके साथ ही हिंदी में इसे डीएनए अंगुली छापन तकनीक से भी लोग जानते हैं|

आज के समय में किसी व्यक्ति को ढूंढने के बाद उसकी पहचान की पुष्टि डीएनए फिंगरप्रिंट यानि अंगुली के निशान के द्वारा की जाती है, जो की उस व्यक्ति की विशिष्ट पहचान होती है | जैसा की आपको पता है की जीव बिज्ञान के अनुसार मानव के संरचना में एक विशेषता होती है और वही विशेषता उस की एक अलग पहचान निर्धारित करती है| उस विशष्ट संरचना को पढने का काम डीएनए फिंगरप्रिंट तकनीक का उपयोग कर के किया जाता है | डीएनए फिंगरप्रिंट सामान्यतः फॉरेंसिक विज्ञान में उपयोग की जाती है | डीएनए फिंगर प्रिंटिंग अगर किसी मनुष्य की ज्ञात करनी हो तो उसके रक्त, ऊत्तक, मृत हड्डी को सैम्पल के तौर पर लिया जाता है |

डीएनए फिंगर प्रिंटिंग का विशेष उपयोग शोध, उद्योग, वंशावली विश्लेषण, स्वास्थ्य जाँच, कृषि आदि क्षेत्रो में भी किया जाता है | भारत में 1988 में हैदराबाद में में इसका संस्थान 'कोशिकीय व आण्विक जीवविज्ञान केंद्र' के रूप में स्थित है और आपको बता दें को भारत वर्ल्ड का तीसरा देश है जहाँ पर डीएनए फिंगर प्रिंटिंग प्रोब को विकसित वरिष्ठ वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है | आज के समय में इसका जबरदस्त उपयोग किया जा रहा है |

डीएनए का फुल फॉर्म क्या है?

इस तकनीक का फुल फॉर्म 'डाई राइबो न्यूक्लिक एसिड' होता है और इसको मनुष्यों के रक्त, बाल, लार, वीर्य के अलावा कोशिका-स्नोतों के द्वारा डाई राइबो न्यूक्लिक एसिड यानि डीएनए की पहचान होती है | इस तकनीक में डाई राइबो न्यूक्लिक एसिड क्रम का उपयोग होता है और इसको माइक्रोसेटेलाइट कहा जाता है जो की डीएनए के छोटे छोटे टुकड़े होते हैं | सभी मनुष्यों के शरीर में इनके नंबर अलग होतें हैं |

आपको ये भी बता दें की डीएनए की लम्बाई अमूमन छः फीट की होती है | विज्ञानं इस बात की पुष्टि करता है की उम्र के अनुसार डीएनए में कोई बदलाव नहीं देखा जाता है | वयक्ति के जन्म लेने से उसकी मृत्यु तक उसके डीएनए में समरूपता बनी रहती है और कुछ देशों ने तो बाहरी लोगों के अपने देश में प्रवेश के लिए डीएनए फिंगरप्रिंट को जरुरी कर दिया है उनमे ऑस्ट्रेलिया के अलावा ब्रिटेन, कनाडा, न्यूजीलैंड भी शामिल हैं |

डीएनए फिंगरप्रिंट की खोज किसने की थी?

आपको बता दें की 1984 में ब्रिटेन के लीसेस्टर विश्वविद्यालय के साइंटिस्ट सर एलेक जेफ़रीस ने डीएनए फिंगरप्रिंट की तकनीक की इजाद करके एक क्रांति ला दी थी | इस तकनीक द्वारा मानव के अंगूठे के निशान से उसकी विशिष्ट की पहचान को सुनिश्चित किया जा सकता था और इसलिए इस तकनीक या विधि को डीएनए फिंगर प्रिंटिंग का उपनाम दिया गया और आज के समय में लगभग सभी शिक्षित लोग इसके बारे में मोटा मोटी जानते हैं | फोरेंसिक विज्ञान में इस तकनीक का उपयोग अपराधियों को पकड़ने में किया जाता है और उनके डीएनए के नमूने को संगृहीत कर के डीएनए एंजाइम द्वारा सेंगमेंटाइज्ड होने की प्रक्रिया की जाती है | उसके बाद एक्स-रे फिल्म पर इसे दिखाया जाता है, जहाँ ये ब्लैक बार के रूप में दीखते हैं, विज्ञानं के शब्दों में इसे ही डीएनए फिंगरप्रिंट कहा जाता है |

डीएनए फिंगरप्रिंट के प्रक्रिया चरण की जानकारी 

  • सबसे पहले डीएनए को पृथक किया जाता है या यों कहें की शुद्धिकरण होता है, क्योकि शुद्ध डीएनए में कई टैंडम पुनरावृत्त होते हैं
  • इसके दुसरे स्टेप में डीएनए को कई जगहों से काट कर विखंडित करने की प्रक्रिया होती है, इन विखंडन को सही ढंग से करने के लिए विशेष रेस्ट्रिक्शन एंज़ाइम का उपयोग किया जाता है
  • थर्ड स्टेप में विखण्डित डीएनए को जैल पर लगा कर विद्युत आवेश से विस्थापित करने की प्रक्रिया की जाती है, इस प्रक्रिया को इलेक्ट्रोफोरेसिस नाम दिया गया है
  • चौथे चरण इसके डी-नैचुरेशन द्वारा दोनों तंतुओं को अलग थलग किया जाता है
  • पांचवे स्टेप में पुराने विखण्डित डीएनए से विशेष खण्डों की जानकारी जुटाई जाती है और इसके लिए रेडियो सक्रिय प्रोब की सेवा ली जाती है

आपको यहाँ पर 'DNA fingerprint kya hai, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग क्या है, डीएनए फिंगरप्रिंट की खोज किसने की थी' की जानकारी सरल करके समझाई गयी है आशा है की आपको जानकारी अच्छी लगी होगी, अगर अच्छी लगी तो सब्सक्राइब करें |

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