साम दाम दंड भेद का अर्थ क्या होता है विस्तार में बतायें

आज हम बात करेंगे की साम दाम दंड भेद का अर्थ हिंदी में क्या होता है | ये पोस्ट मैं अपने अनुभव के आधार पर लिख रहा हूँ | बहुत सी बातें लीक से हट कर होंगी, ओ मेरे अपने विचार होंगे | इस पोस्ट में Chanakya Neeti की भी बात की गयी है आशा है ये पोस्ट आपको पसंद आयेगी |


Saam Daam Dand Bhed
साम दाम दंड भेद का अर्थ


Saam Daam Dand Bhed Meaning In Hindi

हिंदी में ये कहा जाता है की साम दाम दंड भेद का उपयोग तब करना चाहिए जब किसी बात की अति हो जाये | इसका मतलब है की अगर किसी व्यक्ति से कोई काम संपन्न कराना हो और वो जान कर आना कानी करे. जिससे आपको नुक्सान हो रहा हो तो उस पर साम दाम दंड भेद के कहावत को लागू करना चाहिए | अपना काम करवाने के लिए ये एक बेहतरीन चाणक्य नीति है |

इस लोकोक्ति में 'साम' का अर्थ है किसी काम के लिए सुझाव देना या किसी को कहना और 'दाम' का अर्थ है की उस काम को करने के लिए मूल्य चुकाना, इसी की साथ 'दंड' उस काम को नहीं करने पर दिए जाने के लिए लागू होता है| भेद की निति उस के रहस्यों पर चोट करने के लिए होती हैं | चाणक्य की ये निति लोग अपने बचाव के लिए भी उपयोग करते हैं और कुछ लोग इस का इस्तेमाल दूसरो को प्रताड़ित करने के लिए करते हैं |

जगह, काम और समय के अनुसार इस लोकाक्ति को लागू किया जाता है | किसी भी कार्य को कराने के लिए लोग पहले 'साम' यानि उसे समझाने का प्रयास करते हैं और ये उम्मीद करते हैं की उनका काम निर्धारित समय में किया जायेगा | अगर उस काम में वो व्यक्ति रूचि नहीं लेता है या समय से नहीं करता है तो उस व्यक्ति पर 'दाम' निति को अपनाया जाता है | इसके लिए उसे पैसे या उस काम का मूल्य चुकाया जाता है | ये कदम उस को प्रेरित करने के लिए उठाया जाता है की लालच में आकर वो उस काम को कर दे |

इस उपयावो को करने के बाद भी अगर काम न हो तो 'दंड' की निति अपनाई जाती है जिसमे सजा का प्रावधान होता है और इस दंड निति का प्रयोग उस व्यक्ति पर शारीरिक या मानसिक दबाव बनाने के लिए की जाती हैं | 

इन सभी के बाद भी अगर कार्य संपन्न नहीं किया जाता है तो 'भेद' की निति अपनाई जाती है और इस चाणक्य निति के तहत उस व्यक्ति के जीवन से जुडी गुप्त बातों को पता कर के उसे भुनाने की कोशिश की जाती है, जिससे वो दबाव में आकर काम को समाप्त करे |

यहाँ आपको एक उदहारण के द्वारा Saam Daam Dand Bhed को समझाने की कोशिश करता हूँ | मान लीजिये की परिवार का कोई सदस्य कोई गलत कार्य करने जा रहा हो तो 'साम' के तहत आप उसे समझाते हैं, अगर वो फिर भी वही काम करे तो उसे कुछ ऐसा प्रलोभन देते हैं जैसे - पैसा, मिठाई आदि | ये 'दाम' निति के तहत आता है |

अगर वो उसके बाद भी नहीं सुधरता है तो आप 'दंड' के तहत उसके खाने-पीने या बाहर जाने पर प्रतिबंध लगा देते हैं | इन सब के बावजूद भी वो नहीं माने तो परिवार के वरिष्ट सदस्य से उसकी शिकायत कर देते हैं और उसके भेद को लोगों के समक्ष उजागर कर देते हैं |

अब आप समझ गए होंगे की Saam Daam Dand Bhed का अर्थ क्या है |

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