ट्रेन का आविष्कार किसने किया था उसका नाम बताइए

ट्रेन का आविष्कार किसने किया था उसका नाम बताइए - ये आज के लिए ट्रेंडिंग टॉपिक से कम नहीं है | आज हम जानेंगे की, जिस पर हम सवारी करते हैं उस का आविष्कारक कौन है | उसके पहले कुछ और बातो पर भी प्रकाश डालते हैं | 

ट्रेन भारत की सबसे लोकप्रिय और सस्ती सवारी है जो हमारे देश में एक जगह से दूसरी जगह पर जाने के लिए इस्तेमाल की जाती है | इसका उपयोग समाज के सभी वर्गो के लोग करते हैं चाहे वो गरीब हों या आमिर | ट्रेन के अविष्कारक ने भी ये नहीं सोचा होगा की आने वाले समय में ट्रेन यात्रा के लिए कितना बड़ा नेटवर्क हो जायेगा | 

जब ट्रेन का आविष्कार हुवा था तो उस समय इसे कोऐला जलाकर भाप से चलाया जाता था और आज ये इलेक्ट्रिक मोड में आ गया है, हो सकता है की आने वाले समय में ये किसी और स्रोत के मध्यम से पटरियों पर दौड़े|


ट्रेन का आविष्कार किसने किया था उसका नाम बताइए

Train का आविष्कार किसने किया था उसका नाम बताइए


पहले के लोग एक स्थान से दूसरे तक जाने के लिए घोड़े, हाथी आदि पशुवो का ही इस्तेमाल किया करते थे, क्योकि यही पुरातन काल से चला आ रहा था | कहा जाता है की आवश्यकता ही अविष्कार की जननी होती है, तो जब उनकी आवश्यकता बढ़ी और उन्हें सामान आदि ढोने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा तो उन्होंने ट्रेन के बारे में सोचा |

ट्रेन को बनाने का मुख्य उद्देश्य कोऐले की ढुलाई कर के लोहे के कारखानों तक पहुँचाना था जिससे कारखाने का काम चलता रहे | इस कारण से स्टीम इंजन को बनाया गया, परन्तु वो कुछ खास चल नहीं पाया | 

ट्रेन का अविष्कार यात्रियों के साथ सामान ढोने के लिए सफलता पूर्वक जोर्ज स्टीफेंसन (George Stephenson) ने 27 सितम्बर 1885 को लोको-मोशन के नाम के साथ किया था | इस ब्रिटिश इंजिनियर द्वारा बनायी गयी ट्रेन की स्पीड 24 किलोमीटर प्रति घंटा थी | इस पर सबसे पहले 450 के करीब यात्रियों ने यात्रा की और वो यात्रा थी ब्रिटेन के डार्लिंगटन और स्टॉकटन के दरम्यान |

वैसे तो ट्रेन की यात्रा का अपना ही एक आनंद है और भारत में लोग अन्य संसाधनों में ट्रेन का ही उपयोग सबसे ज्यादा करते हैं | लम्बी दूरी की यात्रा का सबसे सुविधा जनक और आरामदायक यात्रा ट्रेन से ही संभव है | अब आप कहेंगे की प्लेन क्यों नहीं ? इसका जबाब है की प्लेन पर सफ़र करना आपके समय को जरुर बचायेगा, लेकिन इस पर आने वाला खर्च आपको बहुत ही रुलाएगा | 

ट्रेन की शुरुआत के बाद विश्व की सबसे पहली इंटर-सिटी ट्रेन का परिचालन 18 सितम्बर 1830 को हुवा था | इंटर-सिटी ट्रेन नाम भी बहुत अलग तरह का है शायद ये नाम कनेक्टिविटी को लेकर दिया गया हो | इंटर का मतलब हुवा आतंरिक और सिटी का मतलब शहर 'आतंरिक शहर को जोड़ने वाला' | ये सही कारण नहीं हो सकता है मैंने बस शब्दों का मतलब निकल कर बताया है | ये बात भी सही है की इंटर सिटी शब्द का प्रचालन आज भी रेलवे में विध्यमान है और इस नाम से ट्रेने चल रही हैं |

समय के साथ ही ट्रेन में भी बदलाव किये गए | पहले ये स्टीम इंजन के रूप में आया उसके बाद डीजल इंजन के साथ, फिर ये इलेक्ट्रोनिक मोड में हमारे सामने आया है और अब इसे बैटरी से चलने वाला बनाने की प्रक्रिया पर काम चल रहा है | ये बदलाव उर्जा के प्राकृतिक स्रोत को बचाने के साथ समय बचत को भी प्रोत्साहित करता है |

ट्रेन की स्पीड और टेक्नोलॉजी को सबसे ज्यादा और प्रभावी तरीके से बदलने वाला देश जापान है | इस देश ने 1964 में ही 164 किलोमीटर प्रति घंटा के रफ़्तार में अपनी ट्रेन को पंहुचा दिया था और पहली बार जापान के टोक्यो और ओसाका शहर की दूरी को पाटने में सफलता हासिल की थी | उसके बाद कई देशो ने अपनी ट्रेन व्यवस्था में सुधार किया | 

आपको एक और जानकारी दे दे की सबसे पहले भूमिगत रेलवे की परिकल्पना ब्रिटेन यानि लन्दन ने की और 1863 में 400 किलोमीटर लम्बाई की भूमिगत रेलवे बनायी |

विश्व के रेलवे में इतने बदलाव हो रहे थे लेकिन भारत भी इसमें पीछे नहीं रहा | भारत ने अपनी सबसे पहली ट्रेन को 1853 को महाराष्ट्र के बोरीबंदर और ठाणे के बीच दौड़ाई | इसमें स्टीम इंजन के साथ 14 डिब्बे जुड़े हुये थे और 400 के करीब लोगो ने इसमें यात्रा की थी | उस समय की इस छोटी सी शुरुआत के साथ ही भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी रेलवे नेटवर्क है और आपको ये जानकर हैरानी होगी की दुनिया का सबसे लम्बा प्लेटफार्म भारत के उत्तरप्रदेश राज्य के गोरखपुर डिस्ट्रिक्ट का है | 


ट्रेन का आविष्कार किसने किया था
पहली ट्रेन कहाँ से कहाँ चली (फोटो लिया गया रेल कारवां से)

आज भारत की सबसे बेहतरीन और गतिमान ट्रेन में 'वंदे भारत एक्सप्रेस' का नाम आता है, सरकार ये भी प्रयास कर रही है की रेलवे का इस तरह से आधुनिकीकरण किया जाये की देश को रेवेनियु भी मिले और यात्री को सुविधा भी |

आज भारत के ट्रेन के कांसेप्ट को बदलने का समय आ गया है और आज महसूस किया जा रहा है की अगर भारत को आर्थिक मोर्चो पर आगे बढ़ना है तो ट्रेडिशनल ट्रेन को बदल कर बुलेट ट्रेन की सोच पर काम करना होगा | आज आप जापान को देख ले वो तो काफी पहले से बुलेट ट्रेन का इस्तेमाल कर रहे हैं | वैसे आपको बता दे की बुलेट ट्रेन का आविष्कारक भी जापानी ही थे उनका नाम है हाइडो शीमा | ये जापान के रेलवे विभाग में चीफ रेलवे इंजिनियर थे और 1964 में ही बुलेट ट्रेन का अविष्कार कर देश को समर्पित कर दिया था | 

इस पोस्ट के माध्यम से आपने जान लिया होगा की ट्रेन का आविष्कार किसने किया था और उसका नाम क्या है ? आपको ये पोस्ट कैसी लगी बताये और अगर अच्छी लगी हो तो सब्सक्राइब करे |

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